Friday, May 24, 2019

英国航母舰长公车私用被紧急调上岸背后的争议

英国皇家海军“伊丽莎白女王”号航空母舰的舰长被指将一辆属于国防部的轿车私用后引发争议。

2019年5月下旬,英国国防部派遣直升机将尼克·库克-普利斯特舰长从在爱丁堡福斯湾的航母上调离。

皇家海军表示,这是正在进行的调查中采取的预防措施。

此前早些时候,英国国防部表示,库克-普利斯特舰长的工作另有任用,但他指挥的航母从苏格兰福斯湾的罗斯港前往南部朴茨茅斯军港的航行计划不变。

虽然库克-普利斯特舰长已经被调离航母,但据信,从官方程序上,他仍在负责指挥该舰,并将一周后的5月底,将正式把航母舰长的职位移交给这艘造价30亿英镑航母的一位新舰长。

库克-普利斯特于1990年加入英国皇家海军,自从去年10月开始担任“伊丽莎白女王”航母的舰长。这是英国唯一的现役航母。

5月中旬,有报告指责他在岸上时使用了国防部一辆福特银河型轿车用于私人用途。英国海军部正在对此进行调查。

一名前军官告诉英国媒体称,库克-普利斯特舰长热爱皇家海军,他不过是做了很多舰长过去几十年来一直在做的事:上岸时开着公家的车回家,而且他自己支付油费。这样一个无心错误毁了他的职业生涯。

根据规定,任何使用英国国防部车辆的人只能将其用于公务,而且行驶每一英里都需要要记录里程数。

英国广播公司BBC被告知,库克-普利斯特舰长使用的公车上行驶里程记录表上的数千英里里程没有上报登记说明用途。

鉴此,英国皇家海军的发言人在一份声明中表示,由于有关调查仍正在进行之中,作为一项预防措施,为了保护有关个人和航母的团队,皇家海军已决定,库克-普利斯特舰长将不再在海上指挥“伊丽莎白女王”航母。

BBC防务事务记者乔纳森·比尔分析说,皇家海军被指没有处理好有关争议。

将航行在海上的一名舰长从舰上带走太武断,特别是在很多人都发声支持他之际。

但这表明,库克-普利斯特舰长已经失去了上级的信任,也失去了他在舰上一些同事的信任。

这并非是兵变,但肯定是个信心问题。

公车私用似乎是个相对较轻的违纪问题。但对高层来说,问题更严重。

英国航空母舰"伊丽莎白女王号"计划在2020年开始服役。这艘航母重达65000吨、最大时速为25节,可携带约40架F35战斗机。

Friday, May 10, 2019

'नेहरू से ज़्यादा ज़ोरदार चुनाव विजयलक्ष्मी पंडित का था फूलपुर में'

प्रयागराज ज़िले की फूलपुर संसदीय सीट शुरू से ही इसलिए चर्चित रही है कि शुरुआती तीन चुनाव यहां से पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लड़े और उसके बाद भी तमाम दिग्गजों ने यहां से अपनी क़िस्मत आज़माई है.

फूलपुर क़स्बे से क़रीब दस किमी दूर देवनहरी गांव के रहने वाले रामनाथ उपाध्याय यूं तो 'देखे गए बसंतों' का शतक लगा चुके हैं लेकिन बातचीत में जोश और दिलचस्प संस्मरणों की फ़हरिस्त में उनकी उम्र कहीं आड़े नहीं आती.

आज़ादी के बाद 1952 में हुए पहली लोकसभा चुनाव को याद करते हुए वो कहते हैं, "पहला चुनाव हो रहा था लेकिन गांव में उसका बहुत असर नहीं था. केवल कुछ पढ़े-लिखे लोग इसका महत्व समझते थे. कोई प्रचार वग़ैरह नहीं हो रहा था. कभी कभी चार-पांच लोग आते थे साइकिल और कार से और लोगों से मिलकर चले जाते थे. जहां मीटिंग होती थी वहां ज़रूर लाउड स्पीकर लगाकर कुछ खद्दरधारी नेता भाषण देते थे और शोर-गुल सुनाई पड़ता था."

रामनाथ उपाध्याय कहते हैं कि फूलपुर से जवाहरलाल नेहरू भले ही चुनाव लड़ते थे लेकिन हमारे गांव कभी नहीं आए, लेकिन जब विजयलक्ष्मी पंडित चुनाव लड़ीं तो वो गांव आईं थीं.

विजयलक्ष्मी पंडित के चुनाव को याद करके रामनाथ उपाध्याय काफ़ी उत्साहित हो जाते हैं, "बहुत ज़ोरदार चुनाव था वो. नेहरू जी की बहिन विजयलक्ष्मी की जैसे लहर चल रही थी. हर गांव में वो जा रही थीं और उनका बहुत स्वागत हो रहा था. हम लोग भी उनका प्रचार किए थे. नेहरू के प्रचार में ज़्यादा दम नहीं रहता था."

लोकसभा में पहुंचने के लिए जवाहर लाल नेहरू ने अपने पैतृक शहर इलाहाबाद ज़िले की फूलपुर सीट को चुना था जिसका एक बड़ा हिस्सा तब ग्रामीण इलाक़े में आता था.

नेहरू ने यहां से 1952, 1957 और 1962 में लगातार तीन बार जीत दर्ज की. नेहरू के निधन के बाद 1967 में उनकी बहन विजयलक्ष्मी पंडित ने यहां से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. हालांकि दो साल बाद 1969 में संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधि बनने के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया.

उनके इस्तीफ़े के बाद 1969 में हुए उपचुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार जनेश्वर मिश्र ने नेहरू की कैबिनेट के सहयोगी रहे केशवदेव मालवीय को हराकर पहली बार इस सीट पर कांग्रेस का वर्चस्व तोड़ा.

रामनाथ उपाध्याय बताते हैं कि पहले चुनाव और उसके बाद भी कुछ चुनावों तक स्थिति ये थी कि ज़्यादातर लोग तो वोट डालने ही नहीं जाते थे.

वो बताते हैं, "उस समय बहुत ज़्यादा लोग वोट डालने भी नहीं निकलते थे. लोगों को पता भी नहीं होता था. लेकिन धीरे-धीरे जानकारी होने लगी तो गांवों में भी मतदान केंद्रों पर लाइनें लगने लगीं. लेकिन तब लड़ाई-झगड़ा नहीं होता था."

1952 के चुनाव में प्रचार को याद करते हुए रामनाथ उपाध्याय एक दिलचस्प संस्मरण सुनाते हैं, "बहुत से लोग तो यह कहकर प्रचार में या मीटिंग में नहीं जाते थे कि इनसे दूर ही रहो. ये कांग्रेसी हैं. सब ज़मीन ज़ब्त कर लेंगे. लेकिन जो भी दिखता था उस समय कांग्रेस का ही प्रचार दिखता था. सोशलिस्ट पार्टी और दूसरे लोगों का तो बिल्कुल भी नहीं दिखता था."

'अब मशीन पर अंगूठा लगाता हूँ'
फूलपुर से नेहरू के ख़िलाफ़ 1962 में सोशलिस्ट नेता राममनोहर लोहिया भी चुनाव लड़े थे लेकिन रामनाथ उपाध्याय को लोहिया के बारे में ज़्यादा याद नहीं है. वो बताते हैं, "हम पढ़े-लिखे ज़्यादा नहीं हैं. बस अपना नाम लिख लेते हैं. कुश्ती लड़ते थे. पहले वोट डालकर बक्से में डाल दिया जाता था, अब मशीन पर अंगूठा लगाता हूं."

रामनाथ उपाध्याय 12 मई को होने वाले मतदान के दिन भी वोट डालने को तैयार बैठे हैं. कहते हैं, "बच्चे गाड़ी पर बिठाकर ले जाएंगे, तो वोट डाल देंगे."

रामनाथ उपाध्याय के पोते विपिन उपाध्याय बताते हैं, "बाबा के पास बहुत से संस्मरण हैं लेकिन अब याद दिलाना पड़ता है. बैठे रहिए तो चुनाव के बारे में और उसके अलावा भी तमाम बातें ख़ूब बताते हैं."

विपिन उपाध्याय ने अपने बाबा से जब ये सवाल किया कि 'वोट किसको डालेंगे', तो रामनाथ उपाध्याय तिलमिला गए, "तोहका काहे बताई. जेका मन करे उही के देब."