मध्य प्रदेश के खंडवा में अंधविश्वास के चक्कर में एक मां ने अपनी नवजात बेटी की उंगलियां काट दी. इसके बाद इंफेक्शन होने से नवजात ने 6 घंटे में ही दम तोड़ दिया. इस घटना की जानकारी स्वास्थ्य अमले को दो दिन बाद लगी तो उनके होश उड़ गए. तत्काल बीएमओ ने महिला के घर पहुंचकर पंचनामा किया और जिम्मेदार कर्मचारियों को नोटिस थमा दिया. यह घटना आदिवासी इलाके के खालवा के ग्राम सुंदरदेव की है.
दरअसल, सुंदरदेव गांव के रहने वाले रामदेव की पत्नी ने शनिवार रात एक बेटी को जन्म दिया था. नवजात बेटी के हाथ व पैरों में छह-छह अंगुलियां थी. यह देख उसकी मां को किसी ने अशुभ होने का अंदेशा दिया. अंधविश्वास में डूबी मां इस कदर घबरा गई कि उसने फसल काटने में काम आने वाला हंसिया निकाला और बच्ची की एक-एक अंगुली ही काट दी.
6 घंटे में इंफेक्शन हुआ और बच्ची की मौत हो गई...
इस घटना को 6 घंटे ही बीते थे कि बच्ची के घावों पर इंफेक्शन हो गया. सोमवार को बच्ची ने दम तोड़ दिया. मौत की खबर गांव में आग की तरह फैली और स्वास्थ्य प्रशासन तक जा पहुंची. खबर लगते ही बीएमओ हरकत में आ गए.
फिर गांव सुंदरदेव पहुंचकर रामदेव की पत्नी से बीएमओ ने बात की तो उसने छठी अंगुली को अशुभ बताते हुए काटना स्वीकार किया. बीएमओ ने घटना के लिए जिम्मेदार मानते हुए सुपरवाइजर, एएनएम, आशा कार्यकर्ता व सहयोगिनी को नोटिस जारी कर दिए.
बताया जा रहा है कि खालवा ब्लाक के जिस गांव में यह घटना हुई वह इलाका आदिवासी है. यहां लोग जंगल में बसे हैं. वहां तक प्रशासन को पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. वो प्रसव की घटना होने पर जननी एक्सप्रेस या 108 को सूचना नहीं दे पाते. वहीं, आदिवासी अंधविश्वास के कारण भी अस्पताल में प्रसव कराने से कतराते हैं.
फौरन इस बात की सूचना पुलिस को दी गई. पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे की तलाशी भी ली. लेकिन वहां से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला. इसके बाद दोनों नीचे उतार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए. अब पुलिस इस मामले में छानबीन कर रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना की घोषणा 2019-20 के अंतरिम बजट में या फिर शीत सत्र के समापन के बाद की जा सकती है. इसके अलावा पहले चरण में लघु और सीमांत किसान को शामिल किया जा सकता है. बता दें कि देश भर में करीब 9 से 11 करोड़ लघु एवं सीमांत किसान हैं. इससे पहले तेलंगाना की तर्ज पर ओडिशा और झारखंड की सरकारों ने भी रैयत बंधु जैसी योजना लागू करने का एलान कर चुकी हैं.
इन विकल्पों पर भी हो रहा विचार!
इसके अलावा भी किसानों को राहत देने के लिए कई विकल्पों पर मंथन जारी है. रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और अधिकारियों के बीच छोटे और सीमांत किसानों को मुफ्त में फसल बीमा देने और उधारी योजनाओं में कुछ फेरबदल करने पर भी चर्चा हुई है. बता दें कि वर्तमान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों से अलग-अगल फसलों के लिए 2 से 5 फीसदी तक की दर से प्रीमियम वसूला जाता है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि किसानों को आय मुहैया कराने की योजना पर सरकारी खजाने पर शुरुआती दौर में करीब 600 से 700 अरब रुपये का बोझ आने का अनुमान है. इस योजना में आने वाली कुल खर्च में केंद्र और राज्यों की हिस्सेदारी कितनी होगी, इस पर विचार हो रहा है.
Friday, December 28, 2018
Wednesday, December 19, 2018
निर्भया कांड के 6 साल बाद भी नहीं बदले हालात, मासूम से रेप
दिल्ली से लेकर पूरे देश को दहला देनेवाले निर्भया कांड को पूरे छह साल गुज़र गए. बातें बहुत हुई, वादे भी बहुत हुए. लेकिन सच्चाई यही है कि ज़मीन पर कुछ भी नहीं बदला. ऐसा हम सिर्फ़ इसलिए नहीं कह रहे कि निर्भया के गुनहगार अब भी अपने अंजाम यानी फांसी के फंदे से दूर हैं, बल्कि इसलिए भी कह रहे हैं कि अब भी हर रोज़ कहीं ना कहीं कोई निर्भया किसी दरिंदे के हाथों कुचली जा रही है.
16 दिसंबर 2018. पूरे छह साल. बातें हुई. विरोध हुआ. तरीके सुझाए गए. सब कुछ बदल देने के दावे किए गए. मगर अफ़सोस नतीजा अब भी वही है. हालात अब भी वही. अगर ऐसा नहीं होता तो दिल्ली का वो परिवार इस वक्त अपनी तकदीर पर रो नहीं रहा होता. आपको जानकर हैरानी होगी कि एक मासूम तो उम्र में भी निर्भया से बहुत छोटी थी. बल्कि छोटी क्या थी अभी इस दुनिया में आए हुए उसे महज़ तीन साल ही हुए थे. लेकिन छोटी उम्र में उसे एक दरिंदे ने अपना शिकार बना डाला और उसके साथ ज़्यादती की.
सही कहें तो निर्भया कांड की बरसी पर दिल्ली फिर शर्मसार हो गई. इस बार 3 साल की मासूम से बलात्कार हुआ. पड़ोसी ने ही मौका पाकर की बच्ची से ज़्यादती की. इत्तेफ़ाक से लोगों ने गुनहगार को रंगे हाथों दबोच लिया और पुलिस के हवाले कर दिया.
मामला दिल्ली के बिंदापुर का है. तीन साल की छोटी बच्ची के साथ उसी के पड़ोस में रहने वाले एक शख्स ने ज़्यादती की. रेप किया. जब बच्ची लहूलुहान हो गई और बुरी तरह होने लगी, तो दूसरे पड़ोसियों को कुछ शक हुआ. जब वो उसके मकान में पहुंचे,तो आरोपी मौके पर ही पकड़ा गया. फिर तो आस-पास के लोगों ने उसे ऐसा सबक सिखाया कि क्या कहने.
असल में इस बच्ची के माता-पिता काम-काज के सिलसिले में घर से बाहर गए थे. और ये बच्ची उसकी बड़ी बहन के साथ घर में मौजूद थी. इस दौरान सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करना वाला रंजीत कुमार उनके घर पहुंचा और बच्ची को अगवा कर लिया. वो बच्ची को लेकर अपने कमरे में आ गया. फिर फूल सी नाज़ुक बच्ची के साथ बलात्कार जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया. रंजीत इस बच्ची के मकान की ऊपरी मंज़िल में रहता है.
मामला अपने-आप में बेहद संगीन है, ऊपर से इत्तेफ़ाक ये है कि ये वाकया भी उसी रोज़ हुआ, जब देश निर्भया कांड जैसी जघन्य वारदात की छठी बरसी मना रहा था. ऐसे में मामले का तूल पकड़ना लाज़िमी था. लिहाज़ा.. दिल्ली महिला आयोग की चेयरमैन स्वाति मालीवाल ने इस मामले को उठाया और एक बार फिर प्रधानमंत्री से ऐसे मामलों को मुद्दा बनाने की बात कही.
बहरहाल, इस मामले में लोगों की मदद से गुनहगार तो दबोच लिया गया. लेकिन शायद लाख कोशिशों के बावजूद क़ानून में वो सख्ती नहीं आई, जिससे गुनहगारों में ख़ौफ़ होता. वैसे इस मामले को समझना ज़्यादा मुश्किल नहीं है. हक़ीक़त यही है कि अब इतने साल बाद भी निर्भया के गुनाहगारों के गले फांसी के फंदे तक नहीं पहुंचे है. काश, हालात बदलें, काश लड़कियां महफ़ूज़ रहें.
16 दिसंबर 2018. पूरे छह साल. बातें हुई. विरोध हुआ. तरीके सुझाए गए. सब कुछ बदल देने के दावे किए गए. मगर अफ़सोस नतीजा अब भी वही है. हालात अब भी वही. अगर ऐसा नहीं होता तो दिल्ली का वो परिवार इस वक्त अपनी तकदीर पर रो नहीं रहा होता. आपको जानकर हैरानी होगी कि एक मासूम तो उम्र में भी निर्भया से बहुत छोटी थी. बल्कि छोटी क्या थी अभी इस दुनिया में आए हुए उसे महज़ तीन साल ही हुए थे. लेकिन छोटी उम्र में उसे एक दरिंदे ने अपना शिकार बना डाला और उसके साथ ज़्यादती की.
सही कहें तो निर्भया कांड की बरसी पर दिल्ली फिर शर्मसार हो गई. इस बार 3 साल की मासूम से बलात्कार हुआ. पड़ोसी ने ही मौका पाकर की बच्ची से ज़्यादती की. इत्तेफ़ाक से लोगों ने गुनहगार को रंगे हाथों दबोच लिया और पुलिस के हवाले कर दिया.
मामला दिल्ली के बिंदापुर का है. तीन साल की छोटी बच्ची के साथ उसी के पड़ोस में रहने वाले एक शख्स ने ज़्यादती की. रेप किया. जब बच्ची लहूलुहान हो गई और बुरी तरह होने लगी, तो दूसरे पड़ोसियों को कुछ शक हुआ. जब वो उसके मकान में पहुंचे,तो आरोपी मौके पर ही पकड़ा गया. फिर तो आस-पास के लोगों ने उसे ऐसा सबक सिखाया कि क्या कहने.
असल में इस बच्ची के माता-पिता काम-काज के सिलसिले में घर से बाहर गए थे. और ये बच्ची उसकी बड़ी बहन के साथ घर में मौजूद थी. इस दौरान सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करना वाला रंजीत कुमार उनके घर पहुंचा और बच्ची को अगवा कर लिया. वो बच्ची को लेकर अपने कमरे में आ गया. फिर फूल सी नाज़ुक बच्ची के साथ बलात्कार जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया. रंजीत इस बच्ची के मकान की ऊपरी मंज़िल में रहता है.
मामला अपने-आप में बेहद संगीन है, ऊपर से इत्तेफ़ाक ये है कि ये वाकया भी उसी रोज़ हुआ, जब देश निर्भया कांड जैसी जघन्य वारदात की छठी बरसी मना रहा था. ऐसे में मामले का तूल पकड़ना लाज़िमी था. लिहाज़ा.. दिल्ली महिला आयोग की चेयरमैन स्वाति मालीवाल ने इस मामले को उठाया और एक बार फिर प्रधानमंत्री से ऐसे मामलों को मुद्दा बनाने की बात कही.
बहरहाल, इस मामले में लोगों की मदद से गुनहगार तो दबोच लिया गया. लेकिन शायद लाख कोशिशों के बावजूद क़ानून में वो सख्ती नहीं आई, जिससे गुनहगारों में ख़ौफ़ होता. वैसे इस मामले को समझना ज़्यादा मुश्किल नहीं है. हक़ीक़त यही है कि अब इतने साल बाद भी निर्भया के गुनाहगारों के गले फांसी के फंदे तक नहीं पहुंचे है. काश, हालात बदलें, काश लड़कियां महफ़ूज़ रहें.
Friday, November 23, 2018
अनंतनाग मुठभेड़ में पत्रकार शुजात बुखारी के हत्यारे समेत 6 आतंकी ढेर
भारतीय सुरक्षा बलों ने अनंतनाग जिले के सेतकीपोरा के बिजबिहाड़ा में जारी मुठभेड़ में 6 आतंकियों को मार गिराया है. क्षेत्र में कुछ आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके के कब्जे में लेकर एनकाउंटर शुरू कर दिया. दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले में सुरक्षा बलों को कई आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली जिसके बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, लंबे चले एनकाउंटर में सुरक्षा बलों ने 6 आतंकियों को मार गिराया है. जिन 6 आतंकियों को ढेर किया गया है, उसमें पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या में शामिल आतंकी आजाद मलिक का नाम भी है. आजाद मलिक के अलावा उनैस शाखी, शाहिद बशीर, बसित इश्तियाक, आकिब नज़र, फिरदौर नजर को सेना ने ढेर कर दिया है. आतंकियों ने इस साल जून में शुजात बुखारी की हत्या की थी.
शव को बरामद कर लिया गया है. हालांकि सुरक्षा बलों की ओर से फायरिंग रोक दी गई है और सर्च ऑपरेशन अभी जारी है. घटनास्थल से हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं. सूत्रों का कहना है कि मारे गए आतंकी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हो सकते हैं, लश्कर पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में सक्रिय था. शवों की पहचान की जानी है.
कल गुरुवार को कुलगाम में सेना के आरआर कैंप पर आतंकियों ने हमला किया. इससे पहले शोपियां में मंगलवार को एनकाउंटर में सुरक्षा बलों ने 4 आतंकियों को मार गिराया. मारे गए सभी आतंकी स्थानीय हैं. हालांकि इस मुठभेड़ में एक जवान भी शहीद हो गया, जबकि 3 अन्य जवान घायल हो गए.
शुजात बुखारी की हत्या से आजाद मलिक का कनेक्शन
बता दें कि कश्मीर के मशहूर पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या की साजिश आतंकवाद के पनाहगाह पाकिस्तान में रची गई थी. इस हत्या को लश्कर-ए-तैय्यबा के खूंखार आतंकियों ने अंजाम दिया था. शुजात बुखारी की हत्या के आरोपियों की पहचान सज्जाद गुल, आजाद अहमद मलिक, मुजाफर अहमद भट और नवीद जट के रूप में हुई थी. सज्जाद गुल अब पाकिस्तान में रहता है, जबकि आजाद अहमद मलिक अनंतनाग जिले का रहने वाला था और लश्कर का आतंकी था.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, लंबे चले एनकाउंटर में सुरक्षा बलों ने 6 आतंकियों को मार गिराया है. जिन 6 आतंकियों को ढेर किया गया है, उसमें पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या में शामिल आतंकी आजाद मलिक का नाम भी है. आजाद मलिक के अलावा उनैस शाखी, शाहिद बशीर, बसित इश्तियाक, आकिब नज़र, फिरदौर नजर को सेना ने ढेर कर दिया है. आतंकियों ने इस साल जून में शुजात बुखारी की हत्या की थी.
शव को बरामद कर लिया गया है. हालांकि सुरक्षा बलों की ओर से फायरिंग रोक दी गई है और सर्च ऑपरेशन अभी जारी है. घटनास्थल से हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं. सूत्रों का कहना है कि मारे गए आतंकी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हो सकते हैं, लश्कर पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में सक्रिय था. शवों की पहचान की जानी है.
कल गुरुवार को कुलगाम में सेना के आरआर कैंप पर आतंकियों ने हमला किया. इससे पहले शोपियां में मंगलवार को एनकाउंटर में सुरक्षा बलों ने 4 आतंकियों को मार गिराया. मारे गए सभी आतंकी स्थानीय हैं. हालांकि इस मुठभेड़ में एक जवान भी शहीद हो गया, जबकि 3 अन्य जवान घायल हो गए.
शुजात बुखारी की हत्या से आजाद मलिक का कनेक्शन
बता दें कि कश्मीर के मशहूर पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या की साजिश आतंकवाद के पनाहगाह पाकिस्तान में रची गई थी. इस हत्या को लश्कर-ए-तैय्यबा के खूंखार आतंकियों ने अंजाम दिया था. शुजात बुखारी की हत्या के आरोपियों की पहचान सज्जाद गुल, आजाद अहमद मलिक, मुजाफर अहमद भट और नवीद जट के रूप में हुई थी. सज्जाद गुल अब पाकिस्तान में रहता है, जबकि आजाद अहमद मलिक अनंतनाग जिले का रहने वाला था और लश्कर का आतंकी था.
Monday, November 12, 2018
देरी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई
सीबीआई के दो शीर्ष अफसरों के बीच विवाद के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा के खिलाफ हुई शुरुआती जांच की रिपोर्ट तीन सीलबंद लिफाफों में कोर्ट को सौंपी। अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने जांच रिपोर्ट समय पर दायर नहीं करने के लिए फटकार भी लगाई।
यह मामला सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और जांच एजेंसी के नंबर-2 अफसर राकेश अस्थाना के बीच विवाद से जुड़ा है। दोनों ने एकदूसरे पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए हैं। इस विवाद के बाद केंद्र ने दोनों अफसरों को जांच लंबित रहने तक छुट्टी पर भेज दिया था। सीबीआई चीफ ने केंद्र के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि सीवीसी इस मामले की जांच करे और रिपोर्ट सौंपे।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एसके कौल की बेंच ने सुनवाई की। इस दौरान सीवीसी की ओर से रिपोर्ट सौंपी गई। सीबीआई के अंतरिम चीफ एम नागेश्वर राव ने भी अपनी अलग रिपोर्ट सौंपी, जिसमें उनकी तरफ से 23 से 26 अक्टूबर के बीच लिए गए फैसलों का ब्योरा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को बताया कि सीवीसी की जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एके पटनायक ने की थी। जांच 10 नवंबर को पूरी कर ली गई थी।
चीफ जस्टिस ने लगाई फटकार
चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि कोर्ट की रजिस्ट्री रविवार को भी खुली थी। इसके बाद भी सीवीसी की रिपोर्ट दायर करने के बारे में रजिस्ट्रार को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने माफी मांगते हुए कहा कि रिपोर्ट सौंपने में हमसे देरी हुई है।
सीबीआई में दो साल से जारी है विवाद
2016 में सीबीआई में नंबर दो अफसर रहे आरके दत्ता का तबादला गृह मंत्रालय में कर अस्थाना को लाया गया था।
दत्ता भावी निदेशक माने जा रहे थे। लेकिन गुजरात कैडर के आईपीएस अफसर राकेश अस्थाना सीबीआई के अंतरिम चीफ बना दिए गए।
अस्थाना की नियुक्ति को वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। इसके बाद फरवरी 2017 में आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ बनाया गया।
सीबीआई चीफ बनने के बाद आलोक वर्मा ने अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर बनाने का विरोध कर दिया।
वर्मा 1984 की आईपीएस बैच के अफसर हैं। अस्थाना 1979 की बैच के आईपीएस अफसर हैं।
अस्थाना मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े मामले की जांच कर रहे थे। कुरैशी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान हैदराबाद का सतीश बाबू सना भी घेरे में आया। एजेंसी 50 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन के मामले में उसके खिलाफ जांच कर रही थी।
सना ने सीबीआई चीफ को भेजी शिकायत में कहा कि अस्थाना ने इस मामले में उसे क्लीन चिट देने के लिए 5 करोड़ रुपए मांगे थे। इनमें 3 करोड़ एडवांस दिए गए। 2 करोड़ रुपए बाद में देने थे।
शीर्ष अफसरों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और विवाद के बाद केंद्र ने वर्मा और अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया था।
इसके खिलाफ आलोक वर्मा और एनजीओ कॉमन कॉज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। बाद में अस्थाना ने भी याचिका लगाई।
यह मामला सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और जांच एजेंसी के नंबर-2 अफसर राकेश अस्थाना के बीच विवाद से जुड़ा है। दोनों ने एकदूसरे पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए हैं। इस विवाद के बाद केंद्र ने दोनों अफसरों को जांच लंबित रहने तक छुट्टी पर भेज दिया था। सीबीआई चीफ ने केंद्र के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि सीवीसी इस मामले की जांच करे और रिपोर्ट सौंपे।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एसके कौल की बेंच ने सुनवाई की। इस दौरान सीवीसी की ओर से रिपोर्ट सौंपी गई। सीबीआई के अंतरिम चीफ एम नागेश्वर राव ने भी अपनी अलग रिपोर्ट सौंपी, जिसमें उनकी तरफ से 23 से 26 अक्टूबर के बीच लिए गए फैसलों का ब्योरा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को बताया कि सीवीसी की जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एके पटनायक ने की थी। जांच 10 नवंबर को पूरी कर ली गई थी।
चीफ जस्टिस ने लगाई फटकार
चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि कोर्ट की रजिस्ट्री रविवार को भी खुली थी। इसके बाद भी सीवीसी की रिपोर्ट दायर करने के बारे में रजिस्ट्रार को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने माफी मांगते हुए कहा कि रिपोर्ट सौंपने में हमसे देरी हुई है।
सीबीआई में दो साल से जारी है विवाद
2016 में सीबीआई में नंबर दो अफसर रहे आरके दत्ता का तबादला गृह मंत्रालय में कर अस्थाना को लाया गया था।
दत्ता भावी निदेशक माने जा रहे थे। लेकिन गुजरात कैडर के आईपीएस अफसर राकेश अस्थाना सीबीआई के अंतरिम चीफ बना दिए गए।
अस्थाना की नियुक्ति को वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। इसके बाद फरवरी 2017 में आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ बनाया गया।
सीबीआई चीफ बनने के बाद आलोक वर्मा ने अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर बनाने का विरोध कर दिया।
वर्मा 1984 की आईपीएस बैच के अफसर हैं। अस्थाना 1979 की बैच के आईपीएस अफसर हैं।
अस्थाना मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े मामले की जांच कर रहे थे। कुरैशी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान हैदराबाद का सतीश बाबू सना भी घेरे में आया। एजेंसी 50 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन के मामले में उसके खिलाफ जांच कर रही थी।
सना ने सीबीआई चीफ को भेजी शिकायत में कहा कि अस्थाना ने इस मामले में उसे क्लीन चिट देने के लिए 5 करोड़ रुपए मांगे थे। इनमें 3 करोड़ एडवांस दिए गए। 2 करोड़ रुपए बाद में देने थे।
शीर्ष अफसरों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और विवाद के बाद केंद्र ने वर्मा और अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया था।
इसके खिलाफ आलोक वर्मा और एनजीओ कॉमन कॉज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। बाद में अस्थाना ने भी याचिका लगाई।
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