भारतीय सुरक्षा बलों ने अनंतनाग जिले के सेतकीपोरा के बिजबिहाड़ा में जारी मुठभेड़ में 6 आतंकियों को मार गिराया है. क्षेत्र में कुछ आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके के कब्जे में लेकर एनकाउंटर शुरू कर दिया. दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले में सुरक्षा बलों को कई आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली जिसके बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, लंबे चले एनकाउंटर में सुरक्षा बलों ने 6 आतंकियों को मार गिराया है. जिन 6 आतंकियों को ढेर किया गया है, उसमें पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या में शामिल आतंकी आजाद मलिक का नाम भी है. आजाद मलिक के अलावा उनैस शाखी, शाहिद बशीर, बसित इश्तियाक, आकिब नज़र, फिरदौर नजर को सेना ने ढेर कर दिया है. आतंकियों ने इस साल जून में शुजात बुखारी की हत्या की थी.
शव को बरामद कर लिया गया है. हालांकि सुरक्षा बलों की ओर से फायरिंग रोक दी गई है और सर्च ऑपरेशन अभी जारी है. घटनास्थल से हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं. सूत्रों का कहना है कि मारे गए आतंकी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हो सकते हैं, लश्कर पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में सक्रिय था. शवों की पहचान की जानी है.
कल गुरुवार को कुलगाम में सेना के आरआर कैंप पर आतंकियों ने हमला किया. इससे पहले शोपियां में मंगलवार को एनकाउंटर में सुरक्षा बलों ने 4 आतंकियों को मार गिराया. मारे गए सभी आतंकी स्थानीय हैं. हालांकि इस मुठभेड़ में एक जवान भी शहीद हो गया, जबकि 3 अन्य जवान घायल हो गए.
शुजात बुखारी की हत्या से आजाद मलिक का कनेक्शन
बता दें कि कश्मीर के मशहूर पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या की साजिश आतंकवाद के पनाहगाह पाकिस्तान में रची गई थी. इस हत्या को लश्कर-ए-तैय्यबा के खूंखार आतंकियों ने अंजाम दिया था. शुजात बुखारी की हत्या के आरोपियों की पहचान सज्जाद गुल, आजाद अहमद मलिक, मुजाफर अहमद भट और नवीद जट के रूप में हुई थी. सज्जाद गुल अब पाकिस्तान में रहता है, जबकि आजाद अहमद मलिक अनंतनाग जिले का रहने वाला था और लश्कर का आतंकी था.
Friday, November 23, 2018
Monday, November 12, 2018
देरी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई
सीबीआई के दो शीर्ष अफसरों के बीच विवाद के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा के खिलाफ हुई शुरुआती जांच की रिपोर्ट तीन सीलबंद लिफाफों में कोर्ट को सौंपी। अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने जांच रिपोर्ट समय पर दायर नहीं करने के लिए फटकार भी लगाई।
यह मामला सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और जांच एजेंसी के नंबर-2 अफसर राकेश अस्थाना के बीच विवाद से जुड़ा है। दोनों ने एकदूसरे पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए हैं। इस विवाद के बाद केंद्र ने दोनों अफसरों को जांच लंबित रहने तक छुट्टी पर भेज दिया था। सीबीआई चीफ ने केंद्र के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि सीवीसी इस मामले की जांच करे और रिपोर्ट सौंपे।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एसके कौल की बेंच ने सुनवाई की। इस दौरान सीवीसी की ओर से रिपोर्ट सौंपी गई। सीबीआई के अंतरिम चीफ एम नागेश्वर राव ने भी अपनी अलग रिपोर्ट सौंपी, जिसमें उनकी तरफ से 23 से 26 अक्टूबर के बीच लिए गए फैसलों का ब्योरा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को बताया कि सीवीसी की जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एके पटनायक ने की थी। जांच 10 नवंबर को पूरी कर ली गई थी।
चीफ जस्टिस ने लगाई फटकार
चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि कोर्ट की रजिस्ट्री रविवार को भी खुली थी। इसके बाद भी सीवीसी की रिपोर्ट दायर करने के बारे में रजिस्ट्रार को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने माफी मांगते हुए कहा कि रिपोर्ट सौंपने में हमसे देरी हुई है।
सीबीआई में दो साल से जारी है विवाद
2016 में सीबीआई में नंबर दो अफसर रहे आरके दत्ता का तबादला गृह मंत्रालय में कर अस्थाना को लाया गया था।
दत्ता भावी निदेशक माने जा रहे थे। लेकिन गुजरात कैडर के आईपीएस अफसर राकेश अस्थाना सीबीआई के अंतरिम चीफ बना दिए गए।
अस्थाना की नियुक्ति को वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। इसके बाद फरवरी 2017 में आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ बनाया गया।
सीबीआई चीफ बनने के बाद आलोक वर्मा ने अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर बनाने का विरोध कर दिया।
वर्मा 1984 की आईपीएस बैच के अफसर हैं। अस्थाना 1979 की बैच के आईपीएस अफसर हैं।
अस्थाना मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े मामले की जांच कर रहे थे। कुरैशी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान हैदराबाद का सतीश बाबू सना भी घेरे में आया। एजेंसी 50 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन के मामले में उसके खिलाफ जांच कर रही थी।
सना ने सीबीआई चीफ को भेजी शिकायत में कहा कि अस्थाना ने इस मामले में उसे क्लीन चिट देने के लिए 5 करोड़ रुपए मांगे थे। इनमें 3 करोड़ एडवांस दिए गए। 2 करोड़ रुपए बाद में देने थे।
शीर्ष अफसरों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और विवाद के बाद केंद्र ने वर्मा और अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया था।
इसके खिलाफ आलोक वर्मा और एनजीओ कॉमन कॉज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। बाद में अस्थाना ने भी याचिका लगाई।
यह मामला सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और जांच एजेंसी के नंबर-2 अफसर राकेश अस्थाना के बीच विवाद से जुड़ा है। दोनों ने एकदूसरे पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए हैं। इस विवाद के बाद केंद्र ने दोनों अफसरों को जांच लंबित रहने तक छुट्टी पर भेज दिया था। सीबीआई चीफ ने केंद्र के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि सीवीसी इस मामले की जांच करे और रिपोर्ट सौंपे।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एसके कौल की बेंच ने सुनवाई की। इस दौरान सीवीसी की ओर से रिपोर्ट सौंपी गई। सीबीआई के अंतरिम चीफ एम नागेश्वर राव ने भी अपनी अलग रिपोर्ट सौंपी, जिसमें उनकी तरफ से 23 से 26 अक्टूबर के बीच लिए गए फैसलों का ब्योरा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को बताया कि सीवीसी की जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एके पटनायक ने की थी। जांच 10 नवंबर को पूरी कर ली गई थी।
चीफ जस्टिस ने लगाई फटकार
चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि कोर्ट की रजिस्ट्री रविवार को भी खुली थी। इसके बाद भी सीवीसी की रिपोर्ट दायर करने के बारे में रजिस्ट्रार को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने माफी मांगते हुए कहा कि रिपोर्ट सौंपने में हमसे देरी हुई है।
सीबीआई में दो साल से जारी है विवाद
2016 में सीबीआई में नंबर दो अफसर रहे आरके दत्ता का तबादला गृह मंत्रालय में कर अस्थाना को लाया गया था।
दत्ता भावी निदेशक माने जा रहे थे। लेकिन गुजरात कैडर के आईपीएस अफसर राकेश अस्थाना सीबीआई के अंतरिम चीफ बना दिए गए।
अस्थाना की नियुक्ति को वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। इसके बाद फरवरी 2017 में आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ बनाया गया।
सीबीआई चीफ बनने के बाद आलोक वर्मा ने अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर बनाने का विरोध कर दिया।
वर्मा 1984 की आईपीएस बैच के अफसर हैं। अस्थाना 1979 की बैच के आईपीएस अफसर हैं।
अस्थाना मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े मामले की जांच कर रहे थे। कुरैशी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान हैदराबाद का सतीश बाबू सना भी घेरे में आया। एजेंसी 50 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन के मामले में उसके खिलाफ जांच कर रही थी।
सना ने सीबीआई चीफ को भेजी शिकायत में कहा कि अस्थाना ने इस मामले में उसे क्लीन चिट देने के लिए 5 करोड़ रुपए मांगे थे। इनमें 3 करोड़ एडवांस दिए गए। 2 करोड़ रुपए बाद में देने थे।
शीर्ष अफसरों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और विवाद के बाद केंद्र ने वर्मा और अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया था।
इसके खिलाफ आलोक वर्मा और एनजीओ कॉमन कॉज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। बाद में अस्थाना ने भी याचिका लगाई।
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