Friday, December 28, 2018

6 अंगुलियों के साथ पैदा हुई बेटी, मां ने हंसिये से काटी एक-एक उंगली

मध्य प्रदेश के खंडवा में अंधविश्वास के चक्कर में एक मां ने अपनी नवजात बेटी की उंगलियां काट दी. इसके बाद इंफेक्शन होने से नवजात ने 6 घंटे में ही दम तोड़ दिया. इस घटना की जानकारी स्वास्थ्य अमले को दो दिन बाद लगी तो उनके होश उड़ गए. तत्काल बीएमओ ने महिला के घर पहुंचकर पंचनामा किया और जिम्मेदार कर्मचारियों को नोटिस थमा दिया. यह घटना आदिवासी इलाके के खालवा के ग्राम सुंदरदेव की है.

दरअसल, सुंदरदेव गांव के रहने वाले रामदेव की पत्नी ने शनिवार रात एक बेटी को जन्म दिया था. नवजात बेटी के हाथ व पैरों में छह-छह अंगुलियां थी. यह देख उसकी मां को किसी ने अशुभ होने का अंदेशा दिया. अंधविश्वास में डूबी मां इस कदर घबरा गई कि उसने फसल काटने में काम आने वाला हंसिया निकाला और बच्ची की एक-एक अंगुली ही काट दी.

6 घंटे में इंफेक्शन हुआ और बच्ची की मौत हो गई...

इस घटना को 6 घंटे ही बीते थे कि बच्ची के घावों पर इंफेक्शन हो गया. सोमवार को बच्ची ने दम तोड़ दिया. मौत की खबर गांव में आग की तरह फैली और स्वास्थ्य प्रशासन तक जा पहुंची. खबर लगते ही बीएमओ हरकत में आ गए.

फिर गांव सुंदरदेव पहुंचकर रामदेव की पत्नी से बीएमओ ने बात की तो उसने छठी अंगुली को अशुभ बताते हुए काटना स्वीकार किया. बीएमओ ने घटना के लिए जिम्मेदार मानते हुए सुपरवाइजर, एएनएम, आशा कार्यकर्ता व सहयोगिनी को नोटिस जारी कर दिए.

बताया जा रहा है कि खालवा ब्लाक के जिस गांव में यह घटना हुई वह इलाका आदिवासी है. यहां लोग जंगल में बसे हैं. वहां तक प्रशासन को पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. वो प्रसव की घटना होने पर जननी एक्सप्रेस या 108 को सूचना नहीं दे पाते. वहीं, आदिवासी अंधविश्वास के कारण भी अस्पताल में प्रसव कराने से कतराते हैं.

फौरन इस बात की सूचना पुलिस को दी गई. पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे की तलाशी भी ली. लेकिन वहां से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला. इसके बाद दोनों नीचे उतार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए. अब पुलिस इस मामले में छानबीन कर रही है.

रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना की घोषणा 2019-20 के अंतरिम बजट में या फिर शीत सत्र के समापन के बाद की जा सकती है. इसके अलावा पहले चरण में लघु और सीमांत किसान को शामिल किया जा सकता है. बता दें कि देश भर में करीब 9 से 11 करोड़ लघु एवं सीमांत किसान हैं. इससे पहले तेलंगाना की तर्ज पर ओडिशा और झारखंड की सरकारों ने भी रैयत बंधु जैसी योजना लागू करने का एलान कर चुकी हैं.

इन विकल्‍पों पर भी हो रहा विचार!

इसके अलावा भी किसानों को राहत देने के लिए कई विकल्‍पों पर मंथन जारी है. रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार के विभिन्‍न मंत्रालयों और अधिकारियों के बीच छोटे और सीमांत किसानों को मुफ्त में फसल बीमा देने और उधारी योजनाओं में कुछ फेरबदल करने पर भी चर्चा हुई है. बता दें कि वर्तमान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों से अलग-अगल फसलों के लिए 2 से 5 फीसदी तक की दर से प्रीमियम वसूला जाता है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि किसानों को आय मुहैया कराने की योजना पर सरकारी खजाने पर शुरुआती दौर में करीब 600 से 700 अरब रुपये का बोझ आने का अनुमान है. इस योजना में आने वाली कुल खर्च में केंद्र और राज्यों की हिस्सेदारी कितनी होगी, इस पर विचार हो रहा है.

Wednesday, December 19, 2018

निर्भया कांड के 6 साल बाद भी नहीं बदले हालात, मासूम से रेप

दिल्ली से लेकर पूरे देश को दहला देनेवाले निर्भया कांड को पूरे छह साल गुज़र गए. बातें बहुत हुई, वादे भी बहुत हुए. लेकिन सच्चाई यही है कि ज़मीन पर कुछ भी नहीं बदला. ऐसा हम सिर्फ़ इसलिए नहीं कह रहे कि निर्भया के गुनहगार अब भी अपने अंजाम यानी फांसी के फंदे से दूर हैं, बल्कि इसलिए भी कह रहे हैं कि अब भी हर रोज़ कहीं ना कहीं कोई निर्भया किसी दरिंदे के हाथों कुचली जा रही है.

16 दिसंबर 2018. पूरे छह साल. बातें हुई. विरोध हुआ. तरीके सुझाए गए. सब कुछ बदल देने के दावे किए गए. मगर अफ़सोस नतीजा अब भी वही है. हालात अब भी वही. अगर ऐसा नहीं होता तो दिल्ली का वो परिवार इस वक्त अपनी तकदीर पर रो नहीं रहा होता. आपको जानकर हैरानी होगी कि एक मासूम तो उम्र में भी निर्भया से बहुत छोटी थी. बल्कि छोटी क्या थी अभी इस दुनिया में आए हुए उसे महज़ तीन साल ही हुए थे. लेकिन छोटी उम्र में उसे एक दरिंदे ने अपना शिकार बना डाला और उसके साथ ज़्यादती की.

सही कहें तो निर्भया कांड की बरसी पर दिल्ली फिर शर्मसार हो गई. इस बार 3 साल की मासूम से बलात्कार हुआ. पड़ोसी ने ही मौका पाकर की बच्ची से ज़्यादती की. इत्तेफ़ाक से लोगों ने गुनहगार को रंगे हाथों दबोच लिया और पुलिस के हवाले कर दिया.

मामला दिल्ली के बिंदापुर का है. तीन साल की छोटी बच्ची के साथ उसी के पड़ोस में रहने वाले एक शख्स ने ज़्यादती की. रेप किया. जब बच्ची लहूलुहान हो गई और बुरी तरह होने लगी, तो दूसरे पड़ोसियों को कुछ शक हुआ. जब वो उसके मकान में पहुंचे,तो आरोपी मौके पर ही पकड़ा गया. फिर तो आस-पास के लोगों ने उसे ऐसा सबक सिखाया कि क्या कहने.

असल में इस बच्ची के माता-पिता काम-काज के सिलसिले में घर से बाहर गए थे. और ये बच्ची उसकी बड़ी बहन के साथ घर में मौजूद थी. इस दौरान सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करना वाला रंजीत कुमार उनके घर पहुंचा और बच्ची को अगवा कर लिया. वो बच्ची को लेकर अपने कमरे में आ गया. फिर फूल सी नाज़ुक बच्ची के साथ बलात्कार जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया. रंजीत इस बच्ची के मकान की ऊपरी मंज़िल में रहता है.

मामला अपने-आप में बेहद संगीन है, ऊपर से इत्तेफ़ाक ये है कि ये वाकया भी उसी रोज़ हुआ, जब देश निर्भया कांड जैसी जघन्य वारदात की छठी बरसी मना रहा था. ऐसे में मामले का तूल पकड़ना लाज़िमी था. लिहाज़ा.. दिल्ली महिला आयोग की चेयरमैन स्वाति मालीवाल ने इस मामले को उठाया और एक बार फिर प्रधानमंत्री से ऐसे मामलों को मुद्दा बनाने की बात कही.

बहरहाल, इस मामले में लोगों की मदद से गुनहगार तो दबोच लिया गया. लेकिन शायद लाख कोशिशों के बावजूद क़ानून में वो सख्ती नहीं आई, जिससे गुनहगारों में ख़ौफ़ होता. वैसे इस मामले को समझना ज़्यादा मुश्किल नहीं है. हक़ीक़त यही है कि अब इतने साल बाद भी निर्भया के गुनाहगारों के गले फांसी के फंदे तक नहीं पहुंचे है. काश, हालात बदलें, काश लड़कियां महफ़ूज़ रहें.