Monday, January 28, 2019

ऑस्ट्रेलिया के बाद न्यूजीलैंड भी फतह, 10 साल बाद कीवियों से जीती वनडे सीरीज

ऑस्ट्रेलिया में पहली बार द्विपक्षीय वनडे सीरीज पर कब्जा करने के बाद भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड में कीवियों के खिलाफ 10 साल बाद बाइलेट्रल वनडे सीरीज पर कब्जा जमा लिया है और 3-0 से अजेय बढ़त हासिल कर ली है. माउंट माउंगानुई में खेले गए तीसरे वनडे मैच में 7 विकेट से जीत दर्ज करते ही भारत ने यह कारनामा कर दिया. भारत को कीवियों के खिलाफ न्यूजीलैंड में आखिरी वनडे सीरीज जीत 2009 में मिली थी.

2009 के बाद कीवियों की धरती पर यह भारत की दूसरी बाइलेट्रल वनडे सीरीज जीत है. भारत ने इस जीत के साथ 2014 में न्यूजीलैंड की ही धरती पर हुई वनडे सीरीज की हार का बदला ले लिया है, जब ब्रेंडन मैक्कुलम की कप्तानी वाली कीवी टीम ने एमएस धोनी की कप्तानी वाली टीम इंडिया को 4-0 से मात दी थी. टीम इंडिया ने 2014 के न्यूजीलैंड दौरे पर वनडे सीरीज में एक टाई समेत सारे मुकाबले गंवाए थे.

अब भारत ने कीवियों के खिलाफ उसकी धरती पर 37 वनडे में से 13 जीत लिए हैं, 21 में उसे हार मिली है. इन दोनों के बीच एक मुकाबला टाई पर छूटा, जबकि 2 मैच बेनतीजा रहे. न्यूजीलैंड की धरती पर भारत 1976 से खेल रहा है. न्यूजीलैंड में भारत की यह 8वीं द्विपक्षीय वनडे सीरीज है. कीवियों की सरजमीं पर भारत ने अब 2 द्विपक्षीय वनडे सीरीज जीत ली हैं. उसे 4 सीरीज गंवानी पड़ी है, जबकि दो सीरीज ड्रॉ रही.

आपको बता दें कि रोहित शर्मा (62) और कप्तान विराट कोहली (60) के अर्धशतकों से भारत ने न्यूजीलैंड को हरा दिया. टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड 49 ओवर में 243 रन पर ऑल आउट हो गई और टीम इंडिया को सीरीज जीत के लिए 244 रनों का टारगेट मिला. न्यूजीलैंड की तरफ से रॉस टेलर ने 93 रन बनाए जबकि टॉम लाथम ने 51 रनों की पारी खेली. भारत के लिए मोहम्मद शमी ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए.

उनके अलावा भुवनेश्वर कुमार, युजवेंद्र चहल और हार्दिक पंड्या को 2-2 विकेट मिले). भारत ने यह लक्ष्य तीन विकेट गंवा कर 43 ओवर में हासिल कर लिया और 7 विकेट से मैच और सीरीज पर कब्जा कर लिया. भारत ने पांच मैचों की वनडे सीरीज में 3-0 से अजेय बढ़त बना ली है. मोहम्मद शमी को 'मैन ऑफ द मैच' का अवॉर्ड मिला.

बहुजन साहित्य संघ की उपाध्यक्ष और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शोध कर रहीं कनकलता यादव पूछती हैं कि विभाग को यूनिट मानने के बाद कितने साल बाद अनुसूचित जनजाति का नंबर आएगा?  फिर अनुसूचित जाति का नंबर आएगा, फिर ओबीसी का नंबर आएगा? इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है. 200 प्वाइंट रोस्टर से पहले 13 प्वाइंट रोस्टर था. इसी कारण OBC, SC, ST प्रोफेसरों की नियुक्ति नहीं हो पाती थी. उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सबसे पहले सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में 2015 में यही 13 प्वाइंट रोस्टर लागू किया था जिस कारण 84 असिस्टेंट प्रोफेसर में ST-SC का एक भी पद नहीं आया था. OBC का एक मात्र पद आया था.

दिल्ली विश्वविद्याल के श्याम लाल कॉलेज में इतिहास विभाग में पढ़ा रहे जितेंद्र कुमार मीणा कहते हैं कि 200 प्वाइंट रोस्टर और 13 प्वाइंट रोस्टर में ध्यान देने वाली बात यह है कि 13 प्वाइंट रोस्टर में 14 नंबर के बाद फिर 1,2,3,4 शुरू हो जाता है. जो 14 नंबर पर जाकर पुनः समाप्त हो जाता है. जबकि 200 प्वाइंट रोस्टर में 1 नंबर से पद शुरू होकर 200 नंबर तक जाता है. इस 200 नंबर के बाद फिर 1,2,3,4,5,6,7 से क्रम शुरू होता है और 200 नंबर तक जाता है. इस स्थिति में अनिवार्य रूप से ST, SC, OBC का पद क्रम आता है. मीणा ने कहा, ‘इस 200 प्वाइंट रोस्टर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और किसी भी विश्वविद्यालय को अनिवार्य रूप से यूनिवर्सिटी को यूनिट मानना पड़ता है. इस स्थिति में ST, SC, OBC के साथ लोकतांत्रिक, सामाजिक और संवैधानिक न्याय होता है. हमें इसी 200 प्वाइंट रोस्टर के लिए तब तक लड़ना है जब तक इसे इस देश सभी विश्वविद्यालयों में लागू न कर दिया जाए.’

रोस्टर का विवाद पहली बार 2006 में सामने आया था. उस समय केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण के तहत नियुक्तियों के सवाल के समाधान के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन यूपीए सरकार के डीओपीटी मंत्रलाय ने 2005 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को पत्र भेजकर यूनिवर्सिटी में आरक्षण लागू करने की खामियों को दूर करने का निर्देश दिया. तब यूजीसी के तत्कालीन चेयरमैन प्रोफेसर वीएन राजशेखरन पिल्लई ने प्रोफेसर रावसाहब काले की अध्यक्षता में आरक्षण को लेकर एक फॉर्मूला बनाने के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी में कानूनविद प्रोफेसर जोश वर्गीज और यूजीसी के तत्कालीन सचिव डॉ. आर के चौहान शामिल थे.

प्रोफेसर काले कमेटी ने डीओपीटी मंत्रालय के 02 जुलाई 1997 के दिशानिर्देश को, जो कि उच्चतम न्यायालय के सब्बरवाल जजमेंट के आधार पर तैयार हुआ है, को आधार मानते हुए 200 प्वाइंट का रोस्टर बनाया. इसमें किसी विश्वविद्यालय के सभी विभाग में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर का तीन स्तर पर कैडर बनाने की अनुशंसा की गई. कमेटी ने विभाग की बजाय विश्वविद्यालय, कॉलेज को यूनिट मानकर आरक्षण लागू करने की सिफारिश की, क्योंकि उक्त पदों पर नियुक्तियां विश्वविद्यालय करता है, न कि उसका विभाग.

इसी 200 प्वाइंट रोस्टर को बीएचयू के छात्र विवेकानंद तिवारी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में में चुनौती दी. हाईकोर्ट ने 200 प्वाइंट की बजाय 13 प्वाइंट रोस्टर को विश्वविद्यालयों में लागू करने का फैसला सुनाया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि आरक्षण विभाग को ईकाई मानकर दिया जाए. इसके लिए 13 प्वाइंट का रोस्टर बना. इसके तहत चौथा पद ओबीसी को, सातवां पद अनुसूचित जाति को, आठवां पद ओबीसी के लिए निर्धारित है. 14वां पद अगर विभाग में आता है, तभी वह अनुसूचित जनजाति को मिलेगा. इनके अलावा सभी पद अनारक्षित घोषित कर दिए गए. अगर 13 प्वाइंट के रोस्टर के तहत आरक्षण को लागू कर भी दिया जाए तो भी असल आरक्षण 30% के आसपास ही रह जाएगा, लेकिन फिलहाल केंद्र सरकार की नौकरियों में एससी-एसटी-ओबीसी के लिए 49.5 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है.